शराब ठेकेदारों को HC का निर्देश, सरकार की नीति मंजूर नहीं तो दुकान सरेंडर करो

Edited By Aditya Pujan | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

NBT
हाइलाइट्स

  • मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश
  • शराब ठेकेदारों को सरकार की नीति मानने के लिए 3 दिन का वक्त
  • नीति नहीं मानने वाले ठेकेदारों को दुकान सरेंडर करने का निर्देश
  • सरेंडर दुकानों के लिए फिर से टेंडर निकालेगी सरकार

जबलपुर।

शराब ठेकेदारों के मामले में गुरुवार को HC ने अहम अंतरिम आदेश जारी किया। कोर्ट ने सरकार की नीति के पक्ष में आदेश जारी करते हुए शराब ठेकेदारों से कहा कि या तो वे नई नीति मंजूर करें या अपनी दुकान सरेंडर करें। सरेंडर करने वाले ठेकेदारों को भी राहत देते कोर्ट ने सरकार को उनसे कोई रिकवरी नहीं करने का निर्देश दिया।

HC ने कहा कि सरकार ने जो नई नीति बनाई है, वो जिन ठेकेदारों को मंजूर है वे तीन दिन के अंदर शपथ पत्र के साथ उसके समक्ष रखें। जिन्हें नीति मंजूर नहीं है, वे अपनी दुकान सरेंडर कर सकते हैं। नई नीति को नहीं मानने वालों से सरकार कोई रिकवरी नहीं करेगी। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि जो लोग नई नीति मानेंगे वे सरकार के नियमानुसार दुकानें चला सकेंगे। जो नहीं मानेंगे, उन्हें दुकानों को सरेंडर करना होगा, जिनका सरकार दोबारा ठेके पर दे सकेगी।

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सरकार को आदेश, ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाए

इसके पहले बुधवार को राज्य सरकार और शराब ठेकेदारों के बीच निविदा की शर्तों को लेकर उपजे विवाद की सुनवाई HC में जारी रही थी। चीफ जस्टिस एके मित्तल व जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की डिवीजन बेंच के समक्ष दोनों पक्षों की ओर से दिग्गज वकीलों ने चार घंटे तक दलीलें दीं। समय की कमी के चलते कोर्ट ने मामले की आगे सुनवाई गुरुवार को भी करने के निर्देश देकर कहा था कि इस बीच ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई न की जाए।

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ठेकेदारों ने दायर की है य़ाचिका


गौरतलब है कि शराब ठेकेदारों ने कोरोना के चलते लॉकडाउन में हुए घाटे का हवाला देकर HC में याचिका दायर की थी। शराब ठेकेदारों ने लॉकडाउन अवधि में हुए नुकसान की भरपाई करने, ठेके के वक्त जमा करवाई गई बिड राशि घटाने या पूरे ठेका नए सिरे से जारी करने की मांग की है। शराब ठेकेदारों ने राज्य सरकार द्वारा आबकारी नीति में किए गए उस संशोधन को भी चुनौती दी है जिसमें सरकार ने किसी ठेकेदार का लाइसेंस रद्द होने पर उसे ब्लैकलिस्ट करने और उसे किसी दूसरे जिले के टेंडर में हिस्सा ना लेने देने का प्रावधान किया गया है।

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